लास्टपास (LastPass) पासवर्ड मैनेजर पासवर्ड मैनेजमेंट में शानदार काम करता है, यूजर्स को लॉगिन क्रेडेंशियल्स सेव करने के लिए एक सुरक्षित वॉल्ट देता है। इसका एंड्रॉइड ऐप भी खूब डाउनलोड हो रहा है। लेकिन एक पासवर्ड मैनेजर तभी काम का है जब यह आपके सिस्टम और ब्राउजर सेशन के लिए ठीक से काम करे। ज्यादातर यूजर्स मोबाइल पर लॉगइन किए ऐप्स से लॉगआउट कभी नहीं करते। असली सुरक्षा की जरूरत वेब पर होती है, जहां ब्राउजर एक्टिविटी पहचान की चोरी और सर्वर ब्रीच के लिए सबसे ज्यादा संवेदनशील होती है।

मगर लास्टपास फॉर क्रोम (LastPass for Chrome) इसमें नाकाम रहा है। लास्टपास का क्रोम प्लगइन लगातार क्रैश हो रहा है, और यूजर्स परेशान हैं - और उनका परेशान होना जायज है। इसलिए हम आपके लिए एक परफेक्ट रिप्लेसमेंट लेकर आए हैं, ताकि लास्टपास की नाकामियों से हमेशा के लिए छुटकारा मिले।
ट्वीकपास (TweakPass), नई पीढ़ी का पासवर्ड मैनेजर, आपकी मनचाही सभी फीचर्स और लॉगिन क्रेडेंशियल्स के लिए बेस्ट सिक्योरिटी के साथ आपका असली साथी है। कैसे? आइए समझते हैं।
लास्टपास एक्सटेंशन और ऐप क्रैश से क्रोम पर क्या समस्याएं आ रही हैं?

अगर आप लास्टपास इस्तेमाल करते हैं, तो आप रोज जिन समस्याओं का सामना करते हैं, उन्हें जानते ही हैं। ऐसा पासवर्ड मैनेजर किस काम का जिससे आप जरूरत के वक्त अपने क्रेडेंशियल्स वॉल्ट से निकाल ही न सकें? ऑटो-फिल में दिक्कतें; ऐप बार-बार बंद हो जाता है; यूजर्स वॉल्ट में लॉगइन नहीं रह पाते; और वे फ्रस्ट्रेटेड हैं। लास्टपास ऐप और इसका क्रोम एक्सटेंशन क्रैश न सिर्फ ऑटो-फिल और पासवर्ड जनरेशन में परेशानी खड़ी करता है, बल्कि यूजर्स को उनके अपने अकाउंट से भी लॉक आउट कर देता है। अगर ऐसा चलता रहा, तो आप अपने पासवर्ड को इस तरह कैसे सुरक्षित रख पाएंगे? साथ ही, अगर ये क्रैश और गंभीर हुए, तो कौन जाने आपके क्रेडेंशियल्स पर ब्रीच अटैक का खतरा न बन जाए।
अगर आपने लास्टपास इस्तेमाल नहीं किया, तो बस गूगल पर "crash issues in LastPass chrome extension" सर्च कर लें - आपको पता चल जाएगा। साइट के फोरम पेज शिकायतों से भरे पड़े हैं। यूजर्स इसे ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐप और एक्सटेंशन रीइंस्टॉल किया, लेकिन फिक्स थोड़े समय ही टिकता है। लास्टपास ऑन क्रोम कुछ घंटों में फिर क्रैश हो जाता है।
संगठनों की टीमें कह रही हैं कि इस इश्यू की वजह से उनका काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और वे नया विकल्प ढूंढ रहे हैं।
अगर ऐसा है, तो हमारे पास आपके लिए एक विकल्प-सह-रिप्लेसमेंट मौजूद है।
ट्वीकपास (TweakPass): आपकी लास्टपास की सारी परेशानियों का अंतिम समाधान
ट्वीकपास पासवर्ड मैनेजर एप्लिकेशन्स की लेटेस्ट कड़ी है। लेकिन यह आपको पारंपरिक पासवर्ड रखने के तरीकों से छुटकारा दिलाता है, जटिल लॉगिन क्रेडेंशियल्स बनाने देता है, और कई ऐसी डिटेल्स सेव करने की सुविधा देता है जिन्हें आप किसी हाल में लीक नहीं होने देना चाहते। ट्वीकपास से आप क्या-क्या कर सकते हैं, देखिए:
ट्वीकपास वेब ऐप
ट्वीकपास वेब ऐप ट्वीकपास डेवलपर्स की कोर सर्विस है। ट्वीकपास कर सकता है:

- शॉपिंग अकाउंट्स, सोशल मीडिया लॉगइन, रेगुलर मेल आदि साइट्स के पासवर्ड सेव करना।
- सिक्योर नोट्स सेव करना, जिसमें आपके काम से जुड़ी जरूरी डिटेल्स जैसे प्रेस रिलीज, गोपनीय पत्र आदि हो सकते हैं।

- क्रेडिट कार्ड डिटेल्स, ट्रैवल प्लान्स, लाइसेंस कीज, पासपोर्ट और सोशल सिक्योरिटी नंबर सेव करना।
- फॉर्म फिल्स सेव करना। फॉर्म फिल्स का इस्तेमाल संगठन कर्मचारियों का डेटाबेस बनाने के लिए कर सकते हैं - नाम से लेकर फाइनेंशियल डिटेल्स तक हर डिटेल रख सकते हैं।
- साइट्स को उनके टाइप के अनुसार कैटेगराइज करना - जैसे अमेजन के लॉगइन शॉपिंग कैटेगरी में जाएंगे।

- एक्सटेंशन सपोर्ट ऑन होने पर पासवर्ड ऑटो-फिल करना।
ट्वीकपास एक्सटेंशन सपोर्ट
यही वह मुख्य इश्यू है जिसका सामना लास्टपास यूजर्स कर रहे हैं - उनका लास्टपास क्रोम एक्सटेंशन बार-बार क्रैश हो जाता है। एक बार क्रैश होने पर ऑटो-फिल जैसे सभी फीचर्स डिसेबल हो जाते हैं। ट्वीकपास क्रोम एक्सटेंशन सपोर्ट आपको ब्राउजर के जरिए ऊपर बताए सभी फीचर्स एक्सेस करने देता है और सुनिश्चित करता है कि ट्वीकपास हर उस पासवर्ड को सेव करे जो आप अलग-अलग साइट्स पर बनाते हैं।

साथ ही, ट्वीकपास एक्सटेंशन पर क्रोम में ऑटो-फिल फीचर एक्टिवेट होता है, साथ ही एक मॉड्यूल भी जो स्पेशल कैरेक्टर्स, अल्फा-न्यूमेरिक्स और मिक्स्ड केस वाले सिक्योर पासवर्ड जनरेट करता है। इसके अलावा, ट्वीकपास एक्सटेंशन केवल क्रोम ही नहीं, फायरफॉक्स, एज (Edge) और ओपेरा (Opera) को भी सपोर्ट करता है।
एंड्रॉइड सपोर्ट और क्रॉस-सिंक फंक्शनैलिटी

ट्वीकपास का एक एंड्रॉइड ऐप भी है। तो जब आप अपने एंड्रॉइड ऐप से क्रोम ऐप पर पासवर्ड सिंक करना चाहें, तो कर सकते हैं। आप कहीं भी अकाउंट एक्सेस कर सकते हैं और चलते-फिरते अकाउंट क्रेडेंशियल्स सेव कर सकते हैं।
लास्टपास पासवर्ड सेव करने के लिए एक पसंदीदा विकल्प रहा है, लेकिन इन क्रैश इश्यूज ने बहुत परेशानी खड़ी कर दी है। अगर आप गूगल पर सर्च करेंगे, तो लास्टपास की कई शिकायतें अगस्त तक पुरानी मिलेंगी। यानी यह महीनों से चल रहा है, और इस इश्यू पर हाल-फिलहाल कोई डेवलपमेंट नहीं हुआ है।
बस बैठकर इसके ठीक होने का इंतजार न करें। इस आधार पर अपना काम खराब न होने दें। ट्वीकपास पर स्विच करें और अभी अपनी समस्याएं हल करें। और अगर आप बेहतर फैसला लेना चाहते हैं, तो 30-दिन का ट्रायल पीरियड आजमाएं और खुद तय करें।