कोई एक उत्तर नहीं — निर्भर करता है:
- एप्लिकेशन आर्किटेक्चर
- डेटाबेस नॉर्मलाइज़ेशन
- टीम स्ट्रक्चर (कई डेवलपर्स → छोटी टेबल)
- डेटा सोर्स (अलग-अलग सोर्स → छोटी टेबल)
- एक्सेस पैटर्न (जॉइन बनाम सिंगल टेबल)
कई छोटी टेबल के फायदे
- मॉड्यूलर डेवलपमेंट
- कंकरेंसी कंट्रोल आसान
- मेंटेनेंस/बैकअप ग्रैनुलर
- सिक्योरिटी (अलग परमिशन)
एक बड़ी टेबल के फायदे
- सिंपल क्वेरी (नो जॉइन)
- कम ओवरहेड
- बेहतर कम्प्रेशन (कॉलम स्टोर में)
बेस्ट प्रैक्टिस: नॉर्मलाइज़ेशन फॉलो करें, फिर परफॉरमेंस टेस्ट करके तय करें।