माइक्रोसॉफ्ट के लोकप्रिय कम्युनिकेशन सॉफ्टवेयर स्काइप को उसके विज्ञापनों के कारण आलोचना झेलनी पड़ी, जिनके जरिए उपयोगकर्ताओं के कंप्यूटर में रैनसमवेयर पहुंचाया जा रहा था। यह पहली बार था जब स्काइप पर उपयोगकर्ताओं के कंप्यूटर में दुर्भावनापूर्ण प्रोग्राम पहुंचाने का आरोप लगा।
सूत्रों के अनुसार, पहली स्क्रीन पर स्काइप एक दुर्भावनापूर्ण और फर्जी विज्ञापन दिखा रहा था जो फ्लैश वेब प्लग-इन के आवश्यक अपडेट के रूप में सामने आ रहा था। इस विज्ञापन से सिस्टम में एक HTML एप्लिकेशन डाउनलोड होता था, जो वैध दिखता था और जब खोला जाता, तो यह एक पूरा पैकेज डाउनलोड करता जो आपके कंप्यूटर को लॉक कर देता और फाइलों को एन्क्रिप्ट करके भारी फिरौती मांगता।

'फेक फ्लैश' विज्ञापन केवल विंडोज कंप्यूटरों को निशाना बनाने के लिए विकसित किया गया था जो एक डाउनलोड पुश करता था। जब इसे खोलने के लिए क्लिक किया जाता, तो यह एक अस्पष्ट जावास्क्रिप्ट ट्रिगर करता। स्क्रिप्ट एक नया कमांड चलाती जो उपयोगकर्ता द्वारा अभी खोले गए एप्लिकेशन को डिलीट कर देती और एक पावरशेल कमांड चलाती, जो एक JSE (जावा एन्कोडेड स्क्रिप्ट) को एक अब अस्तित्वहीन डोमेन से डाउनलोड करती। पूरी प्रक्रिया दुर्भावनापूर्ण फाइल को एंटीवायरस टूल्स से पहचानने से बचने में मदद करती।
इसी प्रकार का मैलवेयर अटैक IBM के X-Force ने भी अनुभव किया, जो थ्रेट इंटेलिजेंस शेयरिंग साइट है। हालांकि, पैकेज एक अलग डोमेन से डाउनलोड किया गया था, लेकिन मैलवेयर उसी अटैक में उपयोग किए गए वेब एड्रेस के पैटर्न से मेल खाता था।
कैसे रहें सुरक्षित:
जागरूकता सुरक्षा की कुंजी है। ऐसी प्रतिकूल स्थितियों से बचने के लिए, आपको यह समझने की जरूरत है कि डाउनलोड के लिए हर प्रॉम्प्ट वैध नहीं होता। जब भी आपको किसी सॉफ्टवेयर के अपडेट के लिए डाउनलोड प्रॉम्प्ट दिखाई दे, चाहे वह कितना भी वैध लगे, हमेशा ऐसे अपडेट को उनकी आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड करना पसंद करें। अपने एंटीमैलवेयर को अपडेट रखें और समय-समय पर सुरक्षा स्कैन चलाएं। जागरूकता ही सुरक्षा की कुंजी है।